PURANI YADEN GYANVIGYAN
Monday, September 7, 2026
Saturday, September 5, 2026
Wednesday, September 2, 2026
Tuesday, September 1, 2026
Wednesday, July 15, 2026
पुरानी यादें
पुरानी यादें
24 -25 साल पहले की बात है । नार्थ जोन सर्जन कांफ्रेंस जम्मू में आयोजित की गई थी । रोहतक से 25-30 डॉक्टर थे । एक दिन सभी का मन वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा का बना। मैने मना किया तो सभी ने अनुरोध किया कि चलें । हम चल दिये ।
अर्ध कन्वारी से कुछ पहले 4-5 महिलाएं और 5-6 पुरुष परेशान से दिखाई दे रहे थे। हमारे में से किसी ने पूछा-क्या बात है क्या हुआ।
बताया- उनके एक बुजुर्ग पेशाब करने बैठे थे और वे नीचे खाई में लुढ़क गए हैं । उन्हें देखने गए हैं।
हमने भी बुजुर्ग को ढूंढने की इच्छा बनाई और 5-6 डॉक्टर हम नीचे उतरते चले गए । 150 गज के करीब नीचे उतरने के बाद हमने आवाज लगाई कि क्या बुजुर्ग मिल गए। और नीचे से आवाज आई- हाँ मिल गए। हमने पूछा- कैसी तबियत है? जवाब आया- ठीक हैं। उप्पर रास्ते में खड़े लोगों ने सुना तो कुछ जय माता की बोलते चले गए।
हमने फिर पूछा कि हम डॉक्टर हैं कोई चोट है तो हम आ जाते हैं मदद करने । बताओ कहाँ पर हो।
फिर आवाज आई थोड़ी धीमी - वो तो चल बसे । इतनी देर में हम भी वहां पहुंच गए थे। पूछा- पहले ठीक क्यों कहा ? जवाब था कि ऊपर वाले रिश्तेदारों में से किसी को सदमा न लग जाये इसलिए ।
कुछ लोगों को तो लगा कि माता ने उस बुजुर्ग को बचा लिया। मगर सच्चाई यही थी कि माता उस बुजुर्ग को नहीं बचा पाई।
मैने सभी डॉक्टर सहयोगियों से पूछा -- यदि बुजुर्ग जिंदा होते और चोटिल होते तो हम क्या फर्स्ट एड कर सकते थे । सब ने अपने अपने ढंग से बात रखी। मैने फिर कहा- बिना इमरजेंसी किट के शायद हम ज्यादा फर्स्ट एड करने की हालत में नहीं होते।
हम सबने तय किया कि जब इस तरह के ग्रुप में कहीं जाएंगे तो इमरजेंसी किट जरूर साथ लेकर चलेंगे ।
बाकियों का तो पता नहीं मैने एक किट जरूर बना ली ।
तीन साल बाद वही कांफ्रेंस पी जी आई चंडीगढ़ में थी। कालेज की बस में गए थे हम सब । वापसी पर अम्बाला पहुंचने से पहले हमारे सामने ट्रैक्टर सड़क के किनारे पलट गया। हमने गाड़ी रुकवाई ।
ड्राइवर ट्रैक्टर के पहिये के नीचे दबा था । हमने सबने मिलकर उसको निकाला और देखा तो वह शॉक में था । मैं ने इमरजेंसी किट से उसे मेफेंटीन इंजेक्शन दिया और एक वोवरान का inj दिया । कुछ संम्भल गया मरीज । हमने उसे अपनी गाड़ी में लिटाया और उसे अम्बाला सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया । इलाज शुरू हुआ तो मरीज और इम्प्रूव हुआ ।
3 साल तक लगता था यह किट खामखा उठाये फिरता हूँ मगर उस रोज लगा कि खामखा नहीं उठाई किट ।
शायद जो डॉक्टर साथी इन दोनों मौकों पर थे उनको याद हों ये दोनों घटनाएं ।
रणबीर दहिया
Sunday, February 15, 2026
Saturday, January 3, 2026
साइकिल वाला
फार्म से पिता जी रिटायर होने का बाद 707 संत नगर में शिफ्ट कर गए।
साइकिल पर नेकी राम कालेज आता था फार्म से बरसींम खेत से काटता फिर गन्डाशे में काटता बोरी भरकर साइकिल पर ले कर जाता । मेडिकल भी एक साल ऐसा रहा। मुझे साइकिल वाला कहा जाने लगा था।
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